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तत्व चिंतन के विविध आयाम गीता के क्रमिक गति के साथ साथ परत दर परत खुलते चले जाएंगे ; इस विधान में हमें और अधिक परिव...
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ब्रह्म विषयक जिज्ञासा [1] से ही अपने मन में यह वृत्ति को उजागर होते हुए देखा जा सकेगा जिसके आधार पर हम उस शक्तियमान ...
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एक आश्रम संस्था के प्रमुख थे ; उनको लोग स्वामी बुद्धानन्द कहा करते थे। उनकी गाड़ी झाड़खंड और ओडिशा की सीमा पर बसे एक ...
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इतना तो तय हो ही गया होगा कि किसी भी ग्रह नक्षत्र मंडल को अनंत अनंत काल के लिए अस्तित्व में नहीं रखा जाएगा; कभी न कभी अपने भरे पूरे संसार ...
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एकबार ठाकुर रामकृष्ण को निर्विकल्प समाधि लेते हुए नरेन छिपकर देख रहे थे | बाद में नरेन काफ़ी आग्रह करने लगे कि उन्हें भी ठाकुर से निर्विकल्प...
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चंदन सुकुमार सेनगुप्ता “ शिक्षा का उद्देश्य तथ्यों को जमा करना और उसपर चर्चा करना नहीं होता है बल्...
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जब राजा विश्वामित्र को यह लगने लगा कि भुजबल से ब्रम्ह ज्ञान कहीं श्रेष्ठ है तो खुद को गहन साधना में लगा दिए और अरण...
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अनुभव कथन का सिलसिला चल पड़ा है और परत दर परत उसमें से कई गुत्थियां सुलझती जा रही है। यह कथन अपने बनारस प्रवास स...
